आज आपको अपनी मौजूदगी में नई ऊर्जा महसूस हो सकती है — सूर्य, बुध और बृहस्पति तीनों आपके व्यक्तित्व और शुरुआत वाले हिस्से से गुज़र रहे हैं, तो शायद आप कुछ नया शुरू करने को तैयार हों या लोगों की नज़र में ज़्यादा आएँ। इसी समय चंद्रमा और केतु आपके पैसे और बोलचाल वाले हिस्से में हैं, इसलिए आज अपनी ज़बान सँभालकर रखें और अपनी चीज़ों की क़द्र समझें। शनि आपके विश्वास और ज्ञान वाले हिस्से में याद दिलाता है कि असली समझ वक़्त माँगती है — धीमे काम पर भरोसा रखें।
| ग्रह |
भाव |
शास्त्रीय ग्रंथों से |
| सूर्य |
पहला भाव |
न शांत न मौन, कम पुत्र, निर्दयी, युद्ध का प्रेमी, दुर्बल दृष्टि वाला, कम बोलने वाला, अन्य देशों में रहता है फिर भी सुखी। — V06 |
| चंद्र |
दूसरा भाव |
लग्न से दूसरे भाव में चंद्रमा की स्थिति शुभ मानी जाती है और इसे मुहूर्त निर्धारण में अनुकूल संकेत माना जाता है। — V13 |
| मंगल |
बारहवाँ भाव |
बारहवें भाव में मंगल आँखों में विकृति या समस्या उत्पन्न करता है। — V04-CLEAN |
| बुध |
पहला भाव |
विद्वान, सुविज्ञ, जादू और खगोल का शौकीन, प्रेत उतारने में समर्थ, गणित और काव्य का प्रेमी, सम्मानित, दीर्घायु। — NV17 |
| गुरु |
पहला भाव |
बृहस्पति विशिष्ट स्थितियों से चक्र आरंभ करता है; प्रथम वर्ष प्रभव कहलाता है जब बृहस्पति धनिष्ठा में उदित हो। — N02 |
| शुक्र |
तीसरा भाव |
लग्न या कारक से तीसरे भाव में शुक्र का संबंध रति-रोग या रक्त संबंधी परेशानियों की ओर संकेत करता है, परंतु गुरु के साथ होने पर शांतिपूर्ण अंत सूचित करता है। — V11 |
| शनि |
नौवाँ भाव |
इस घर में शनि भाग्य और उच्च शिक्षा को अनुशासन के साथ संतुलित करता है, और अक्सर करियर व प्रतिष्ठा से जुड़े मामलों के साथ मिलकर स्थिर व गंभीर प्रयास से मार्ग निर्धारित करता है। — L06 |
| राहु |
आठवाँ भाव |
आठवें भाव में राहु, विशेष रूप से मंगल के साथ, जीवनसाथी की हानि से जुड़ा होता है; कुछ कुंडलियों में यह नौवें भाव के स्वामी के साथ भी पाया जाता है। — V07 |