आज आपकी व्यक्तिगत ऊर्जा में एक मजबूत उछाल रहेगा, जो खुद को एक नई शुरुआत देने का अच्छा समय है। साथ ही, घर और परिवार के मामलों पर थोड़ा ध्यान देने की जरूरत है ताकि शांति बनी रहे, जबकि आपका मन कुछ नया सीखने और यात्राओं की ओर भी जाएगा।
| ग्रह |
भाव |
शास्त्रीय ग्रंथों से |
| सूर्य |
तीसरा भाव |
यदि सूर्य, गुरु और मंगल के साथ तृतीयेश या तृतीय भाव कारक को विषम राशि में देखे तो भाइयों की उपस्थिति सूचित होती है। — V15 |
| चंद्र |
नौवाँ भाव |
वृश्चिक लग्न वालों के लिए, नवम भाव के स्वामी चंद्रमा और दशम भाव के स्वामी सूर्य का संयोग मिलकर बेहतर परिणाम देता है। — V19 |
| मंगल |
पहला भाव |
पहले घर में मंगल दृढ़ इच्छाशक्ति और साहस देता है, लेकिन सूर्य के साथ हो तो घरेलू विवाद या रक्त संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। — L07 |
| बुध |
चौथा भाव |
लग्न से चौथे भाव में बुध, विशेषकर शुक्र के साथ, सामान्यतः अशुभ माना जाता है, परंतु बृहस्पति की अच्छी स्थिति के साथ यह अशुभ प्रभावों को दूर कर यात्रा को शांतिपूर्ण बना सकता है। — N01 |
| गुरु |
पहला भाव |
पहले भाव में मजबूत बृहस्पति जो अशुभ ग्रहों से अप्रभावित हो, संतान की प्राप्ति सुनिश्चित करता है। जब बृहस्पति पंचम भाव के स्वामी के साथ लग्न में हो तो संतान के लिए शुभ है। — V09 |
| शुक्र |
चौथा भाव |
शुक्र यदि चौथे भाव का स्वामी हो और ग्यारहवें भाव के साथ हो तो अशुभ है, परंतु नवम भाव के साथ होने पर शुभ फलदायक होता है। — V19 |
| शनि |
नौवाँ भाव |
शनि का बुध और मंगल के साथ नवम भाव में होना गंगा स्नान जैसे पवित्र तीर्थ यात्रा से जुड़े योग का हिस्सा बनता है। — V12 |
| राहु |
आठवाँ भाव |
राहु आठवें भाव में हो तो आयु कम होती है, व्यक्ति अशुद्ध कर्मों की ओर झुकता है, किसी अंग में दोष होता है, वात रोग होता है, और संतान सीमित होती है। — V04-CLEAN |